I'm a proud Hindu. I love to analyse Indian History and refute where ever i find inconsistencies. I like to roast Hinduphobics.
Indian history has been written by our invaders, hence not trustworthy. I refer to ancient texts to understand Indian history rather than books written by people who have relied on our conquerors account of India in their times.
*भीष्म चुप रहे , कुछ क्षण बाद बोले," पुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक करा चुके केशव ... ?* *उनका ध्यान रखना , परिवार के बुजुर्गों से रिक्त हो चुके राजप्रासाद में उन्हें अब सबसे अधिक तुम्हारी ही आवश्यकता है" .... !* *कृष्ण चुप रहे .... !* *भीष्म ने पुनः कहा , "कुछ पूछूँ केशव .... ?* *बड़े अच्छे समय से आये हो .... !* *सम्भवतः धरा छोड़ने के पूर्व मेरे अनेक भ्रम समाप्त हो जाँय " .... !!* *कृष्ण बोले - कहिये न पितामह ....!* *एक बात बताओ प्रभु ! तुम तो ईश्वर हो न .... ?* *कृष्ण ने बीच में ही टोका , "नहीं पितामह ! मैं ईश्वर नहीं ... मैं तो आपका पौत्र हूँ पितामह ... ईश्वर नहीं ...."* *भीष्म उस घोर पीड़ा में भी ठठा के हँस पड़े .... ! बोले , " अपने जीवन का स्वयं कभी आकलन नहीं कर पाया कृष्ण , सो नहीं जानता कि अच्छा रहा या बुरा , पर अब तो इस धरा से जा रहा हूँ कन्हैया , अब तो ठगना छोड़ दे रे .... !! "* *कृष्ण जाने क्यों भीष्म के पास सरक आये और उनका हाथ पकड़ कर बोले .... " कहिये पितामह .... !"* *भीष्म बोले , "एक बात बताओ कन्हैया ! इस युद्ध में ज...
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Dus Avatar - Darwin's Theory
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एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से विडियो चैट करते वक्त *पूछ बैठी-*
*"बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?"*
*बेटा बोला-*
*"माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम* कर रहा हूँ। *विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके बारे में सुना भी है?"*
*उसकी माँ मुस्कुराई*
और *बोली.....*
*"मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ बेटा.. उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है।"*
“हो सकता है माँ!” बेटे ने भी *व्यंग्यपूर्वक* कहा।
*“यदि तुम कुछ समझदार हो, तो इसे सुनो..” उसकी माँ ने प्रतिकार किया।*
*“क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है?*
*विष्णु के दस अवतार ?”*
बेटे ने सहमति में कहा...
*"हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?"*
*माँ फिर बोली-*
*"लेना-देना है..*
*मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हो ?"*
*“पहला अवतार था 'मत्स्य', यानि मछली।* ऐसा इसलिए कि
*जीवन पानी में आरम्भ हुआ। यह बात सही है या नहीं?”*
बेटा अब ध्यानपूर्वक सुनने लगा..
“उसके बाद आया *दूसरा अवतार 'कूर्म', अर्थात् कछुआ*
क्योंकि
*जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया.. 'उभयचर (Amphibian)',*
तो *कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर के विकास को दर्शाया।”*
*“तीसरा था 'वराह' अवतार, यानी सूअर।* जिसका मतलब *वे जंगली जानवर, जिनमें अधिक बुद्धि नहीं होती है*। *तुम उन्हें डायनासोर कहते हो।”*
बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई..
*“चौथा अवतार था 'नृसिंह', आधा मानव, आधा पशु*। जिसने दर्शाया *जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों का विकास।”*
*“पांचवें 'वामन' हुए, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था*।
क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? *क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव),* और
*होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली।”*
बेटा दशावतार की प्रासंगिकता सुन के स्तब्ध रह गया..
माँ ने बोलना जारी रखा-
*“छठा अवतार था 'परशुराम', जिनके पास शस्त्र (कुल्हाड़ी) की ताकत थी*। वे दर्शाते हैं उस *मानव* को, *जो गुफा और वन में रहा.. गुस्सैल और असामाजिक।”*
*“सातवां अवतार थे 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम', सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति।* जिन्होंने *समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।”*
*“आठवां अवतार थे 'भगवान श्री कृष्ण', राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी।* जिन्होंने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि *सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला-फूला जा सकता है?*”
बेटा सुनता रहा, चकित और विस्मित..
*माँ ने ज्ञान की गंगा प्रवाहित रखी -*
*“नवां * थे 'महात्मा बुद्ध', वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।”*
“..और अंत में *दसवां अवतार 'कल्कि' आएगा।* *वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो.. वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा।”*
*बेटा अपनी माँ को अवाक् होकर देखता रह गया..*
*अंत में वह बोल पड़ा-*
*“ ... यह अद्भुत है माँ.. हिंदू दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है!”*
*वेद, पुराण, ग्रंथ, उपनिषद इत्यादि सब अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का दृष्टिकोण होना चाहिए। फिर चाहे वह धार्मिक हो या वैज्ञानिकता...!*
Conversions धर्म परिवर्तन - मोदी ने क्या किया As narrated by an IB official 30 Dec. 2017 को एक आदमी केरल के कोच्ची हवाई अड्डे पर आता है बैंकाक से. जैसे ही वो इमीग्रेशन पर पासपोर्ट देता है तो कम्प्यूटर में चेक करने के बाद महिला इमग्रेशन अफसर उससे उसका नाम बोलने को कहती है. वो आदमी बोलता है नाम पासपोर्ट पर लिखा है वो अफसर डाँट के बोलती है..बहस नहीं नाम बोलो! वो नाम बोलता है..इमीग्रेशन अफसर तत्काल उसको अपने सीनियर के हवाले कर देती है. पूरी रात वो आदमी हवाई अड्डे के उस कमरे में बैठा रहता है. सुबह की पहली फ्लाइट से वापस उसको देश से निकाल दिया जाता है.इससे पहले रात भर वो आदमी केरल से लेकर दिल्ली तक के हर बड़े कांटेक्ट को फ़ोन करता है. लेकिन उसकी दाल नहीं गलती. केंद्र सरकार से सीधे आदेश है और IB के लोग हवाई अड्डे पर जमे हैं.कोई कुछ नहीं कर सकता.100 साल से ऊपर पुरानी पार्टी के लोग उसको घुसाने के लिए हर जुगाड़ लगाते हैं. लेकिन कुछ नहीं कर पाता। मोदी - राजनाथ की सीधे निगाह है.इस आदमी का नाम हैHenri Thipagne और मदुरई स्थित NGO Peoples Watch संस्था का फण्ड प्रोवाइडर हैं.ये NGO धर्म परिवर्तन का काम कर...
*भीष्म चुप रहे , कुछ क्षण बाद बोले," पुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक करा चुके केशव ... ?* *उनका ध्यान रखना , परिवार के बुजुर्गों से रिक्त हो चुके राजप्रासाद में उन्हें अब सबसे अधिक तुम्हारी ही आवश्यकता है" .... !* *कृष्ण चुप रहे .... !* *भीष्म ने पुनः कहा , "कुछ पूछूँ केशव .... ?* *बड़े अच्छे समय से आये हो .... !* *सम्भवतः धरा छोड़ने के पूर्व मेरे अनेक भ्रम समाप्त हो जाँय " .... !!* *कृष्ण बोले - कहिये न पितामह ....!* *एक बात बताओ प्रभु ! तुम तो ईश्वर हो न .... ?* *कृष्ण ने बीच में ही टोका , "नहीं पितामह ! मैं ईश्वर नहीं ... मैं तो आपका पौत्र हूँ पितामह ... ईश्वर नहीं ...."* *भीष्म उस घोर पीड़ा में भी ठठा के हँस पड़े .... ! बोले , " अपने जीवन का स्वयं कभी आकलन नहीं कर पाया कृष्ण , सो नहीं जानता कि अच्छा रहा या बुरा , पर अब तो इस धरा से जा रहा हूँ कन्हैया , अब तो ठगना छोड़ दे रे .... !! "* *कृष्ण जाने क्यों भीष्म के पास सरक आये और उनका हाथ पकड़ कर बोले .... " कहिये पितामह .... !"* *भीष्म बोले , "एक बात बताओ कन्हैया ! इस युद्ध में ज...
जिस हाल में आज पाकिस्तान हैं, एैसे ही हाल में छोड़ के गए थे राजीव गाँधी भारत को... सोनिया ने पर्दे के पीछे किस कदर लूट की होगी ? सोचिये... तब 40 करोड़ के लिए सोना गिरवी रखा था... जबकि 64 करोड़ की दलाली तो सिर्फ बोफोर्स में खाई गयी थी... RBI गवर्नर रहे Y.V रेड्डी की पुस्तक ADVISE AND DECENT से साभार... काँग्रेस के शासनकाल में सिर्फ 40 करोड़ रुपए के लिए हमें अपना 47 टन सोना गिरवी रखना पड़ा था । ये स्थिति थी भारतीय इकॉनॉमी की । मुझे याद हैं नब्बे के शुरुआती दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था को, वो दिन भी देखना पड़ा था जब, भारत जैसे देश को भी अपना सोना विश्व बैंक में गिरवी रखना पड़ा था... राजीव गाँधी के शासनकाल में देश की तिजोरी खाली हो चुकी थी । और तभी प्रधान मंत्री राजीव गाँधी की हत्या लिट्टे के आतंकियों ने कर दी थी... चन्द्रशेखर तब नए नए प्रधान मंत्री बने थे... तिजोरी खाली थी । वे घबरा गए । करें तो क्या करें ? Reddy अपने पुस्तक मे लिखते हैं कि पूरे देश में एक तरह का निराशा भरा माहौल था... राजीव गाँधी ने अपने शासनकाल में कोई रोज़गार नहीं दिया था। नया उद्योग धन्धा नहीं... एक बिजनेस डालने जाओ...
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Thanks